Sunday, March 14, 2010

प्रतिमा

प्रतिमा ,
तुम रूप हो 
किसी का ,या 
जादू हो ,
किसी के नाजुक 
हाथों के 
पोरों की 
तुम , कला हो 
या 
कलाकार को तुम 
गढ़ती हो 
या कलाकार तुम्हें 
गढ़ता है |
तुम पसंद हो 
उसकी या 
वो पसंद है , तुम्हारी|
प्रेरणा हो 
तुम उसकी या 
प्रेरित है वो तुमसे ,
प्रियतम है वो 
तुम्हारा या 
प्रेयसी हो तुम 
उसकी |
साधिका हो तुम 
उसकी या 
साधक है वो 
तुम्हारा |
हे !! प्रतिमा !!
याचिका हो तुम 
उसकी या
याचक है वो 
तुम्हारा ?
क्या हो ????

विद्धया शर्मा ..

1 comment:

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर रचना । आभार
ढेर सारी शुभकामनायें.

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com