Thursday, March 25, 2010

तिनका

मुझे , बहाकर ले गई 
एक धारा ,
तब , क्या खबर थी 
क्या होगा ?
कहाँ जाऊंगा ?
भंवरों में घिर गया 
तो ,
झिंझोड़ा जाऊंगा ,
पत्थरों से ,
टकरा गया तो ,
टूटकर लहरों में 
समां जाऊंगा ,
किनारा मिल गया तो ,
ठोकर से खेला 
जाऊंगा ,
बार -बार 
घूमता ही रहूँगा 
तभी समझ पाउँगा 
संसार चक्र को |


विद्या शर्मा ..

No comments: