Sunday, March 28, 2010

पुल

पुल !! तुम
सुच -मच
महान हो ,
कभी न मिलने वाले
किनारे भी ,
मिलाकर
असंभव को संभव कर दिया है|
छोटे गाँव को
शहर से जोड़
दिया है |
वीरानों को
भीड़ से मिला दिया है |
रिश्तों को
दिलों से जोड़
दिया है |
नई-नई  आशाओं को
साकार किया है |
पुल !!
तुम महान हो |

विद्या शर्मा ...

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