Sunday, March 28, 2010

चक्षु

चक्षु !!
शरीर की 
दहलीज पर 
लगी , चौखट के 
कपाट ही हैं ,
संस्कारों के 
गवाक्ष हैं ,
संस्कृति के 
पहरेदार हैं ,
सुरक्षा के 
स्तम्भ  हैं ,
दिल का द्वार हैं ,
पीड़ा का 
संचार हैं ,
ममता का उद्गार हैं ,
छल ,दंभ , कटुता का 
आभास हैं ,
चक्षु !!
इस महल की 
भव्यता और
एकता का आइना हैं ,
जीवन की 
सत्यता का 
प्रतिबिम्ब हैं ,
चक्षु हमारा 
व्यक्तित्व ही हैं |

विद्या शर्मा ...

6 comments:

संजय भास्कर said...

शरीर की दहलीज पर लगी , चौखट के कपाट ही हैं



... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

kavisurendradube said...

बहुतअच्छा लिखा है

राजेश उत्‍साही said...

आंखों की सुंदर परिभाषा है।

Mukesh Kumar Sinha said...

aankho ko vyakt karte sundar shabd....jo dil ko chhu rahe hain....:)

kabhi hamare blog pe dustak den...

Parul said...

bahut sundar!

mridula pradhan said...

चक्षु हमारा
व्यक्तित्व ही हैं |
ekdam sahi kaha.....