Tuesday, February 16, 2010

हे प्रभु जी !! आओ , एक बार

हे !! प्रभु जी !!
आप पृथ्वी पर आयें 
और देख लें ,
कि..
जीवन क्या होता है ?
सुख और दुःख का 
आभास करें .
भूख और प्यास की 
तड़फ का अनुभव करें ,
तपती दुपहरी में 
जब पांव जलें 
जमी पर .
सर्दी से जब ,
वदन ठिठुरता 
भीगे तन - मन बारिस में .
दर-दर की ठोकर खाते 
फिर भी न मिलाता चैन .
चना -चबैना कोई देता 
एक लोटा पानी .
तृषा शांत तब हो जाती ,
जब , छाँव मिल जाती प्यारी .
चार -दीवारें और एक छत 
कैसे मिलाती ?
ये तुम कैसे जानोगे ?
जब गज भर धरती 
नसीब होती , मुश्किल से .
आओ , एक बार 
प्रभु जी !! 
देखो दुनियां दारी.
विद्या शर्मा ...

8 comments:

अमित जैन (जोक्पीडिया ) said...

बहुत बदिया

हृदय पुष्प said...

"प्रभु जी !! आप पृथ्वी पर आयें और देख लें कि..जीवन क्या होता है?.. देखो दुनियां दारी"
अगर "उन्हें" नहीं पता है तो अवश्य आना और देखना चाहिए.

डॉ.कुमार गणेश 369 said...

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जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
कलम के पुजारी अगर सो गये तो
ये धन के पुजारी
वतन बेंच देगें।



हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

INDRADHANUSH said...

Welcome!

भूतनाथ said...

aapke prabhu ji ne is bhoot ko bhej diya yah sab dekhne ko.....kahane lage unkaa saahas nahin hota unki apni hi banayi duniya men aane....so yah beeda ab bhoot nath ne hi uthaya hua hai....baaki aapne jo praarthanaa kahi hai usase ham abhibhut hue...aur prabhuji ko isi vakt jaakar sunaayenge....sach.....prabhu bade dayaalu hain...sabki sunte hain....sirf meri chodkar.....!!

पवन चंदन said...

ब्‍लागिंग में आपका स्‍वागत है
अच्‍छी कविता प्रस्‍तूत की है
अवलोकन के लिए एक ब्‍लाग का लिंक दे रहा हूं
अपने विचार देना
http://chokhat.blogspot.com/

संगीता पुरी said...

हिंदी चिट्ठा जगत में आपको देखकर खुशी हुई .. सफलता के लिए बहुत शुभकामनाएं !!